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नागरिक अधिकारों पर रेडियो और टीवी पता, 6/11/63 - इतिहास

नागरिक अधिकारों पर रेडियो और टीवी पता, 6/11/63 - इतिहास

शुभ संध्या, मेरे साथी नागरिकों:

आज दोपहर, धमकियों और उद्दंड बयानों की एक श्रृंखला के बाद, अलबामा के उत्तरी जिले के संयुक्त राज्य जिला न्यायालय के अंतिम और स्पष्ट आदेश को पूरा करने के लिए अलबामा विश्वविद्यालय में अलबामा नेशनल गार्ड्समेन की उपस्थिति की आवश्यकता थी। , उस आदेश में दो बेहद योग्य युवा अलबामा निवासियों के प्रवेश के लिए बुलाया गया जो नीग्रो पैदा हुए थे।

अलबामा विश्वविद्यालय के छात्रों के आचरण के कारण उन्हें परिसर में शांतिपूर्वक प्रवेश दिया गया था, जिन्होंने रचनात्मक तरीके से अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किया।

मुझे उम्मीद है कि हर अमेरिकी, चाहे वह कहीं भी रहता हो, रुकेगा और इस और अन्य संबंधित घटनाओं के बारे में अपने विवेक की जांच करेगा। इस राष्ट्र की स्थापना कई राष्ट्रों और पृष्ठभूमि के पुरुषों द्वारा की गई थी। यह 'इस सिद्धांत पर स्थापित किया गया था कि सभी पुरुषों को समान बनाया गया है, और यह कि प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार कम हो जाते हैं जब एक व्यक्ति के अधिकारों को खतरा होता है।

आज हम मुक्त होने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए एक विश्वव्यापी संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं। और जब अमेरिकियों को वियतनाम या पश्चिम बर्लिन भेजा जाता है, तो हम केवल गोरे नहीं मांगते। इसलिए, किसी भी रंग के अमेरिकी छात्रों के लिए किसी भी सार्वजनिक संस्थान में भाग लेने के लिए संभव होना चाहिए, जिसे वे सैनिकों द्वारा समर्थित किए बिना चुनते हैं।

किसी भी रंग के अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए सार्वजनिक आवास के स्थानों, जैसे होटल और रेस्तरां और 'थिएटर और खुदरा स्टोर में समान सेवा प्राप्त करना संभव होना चाहिए, सड़क पर प्रदर्शनों का सहारा लेने के लिए मजबूर किए बिना, और यह संभव होना चाहिए किसी भी रंग के अमेरिकी नागरिकों को बिना किसी हस्तक्षेप या प्रतिशोध के भय के स्वतंत्र चुनाव में पंजीकरण करने और मतदान करने के लिए।

यह संभव होना चाहिए, संक्षेप में, प्रत्येक अमेरिकी के लिए अपनी जाति या अपने रंग की परवाह किए बिना अमेरिकी होने के विशेषाधिकारों का आनंद लेना चाहिए। संक्षेप में, प्रत्येक अमेरिकी को अपने बच्चों के साथ वैसा ही व्यवहार करने का अधिकार होना चाहिए जैसा वह चाहता है, जैसा कि कोई चाहता है कि उसके बच्चों का इलाज किया जाए। पर ये स्थिति नहीं है।

आज अमेरिका में पैदा हुआ नीग्रो बच्चा, राष्ट्र के जिस वर्ग में पैदा हुआ है, उसकी परवाह किए बिना, उसी दिन उसी स्थान पर पैदा हुए एक सफेद बच्चे के रूप में हाई स्कूल पूरा करने का लगभग आधा मौका है, एक- तीसरा कॉलेज पूरा करने का मौका, पेशेवर आदमी बनने का एक तिहाई मौका, बेरोजगार होने का दोगुना मौका, लगभग एक। १०,००० डॉलर प्रति वर्ष कमाने का सातवां मौका, एक जीवन प्रत्याशा जो ७ साल कम है, और केवल आधी कमाई की संभावनाएं।

यह कोई विभागीय मुद्दा नहीं है। अलगाव और भेदभाव पर कठिनाइयाँ हर शहर में, संघ के हर राज्य में मौजूद हैं, जिससे कई शहरों में असंतोष का ज्वार पैदा हो रहा है जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा है। न ही यह कोई दलगत मुद्दा है। घरेलू संकट के समय में सद्भावना और उदारता के लोगों को पार्टी या राजनीति की परवाह किए बिना एकजुट होने में सक्षम होना चाहिए। यह अकेले कानूनी या विधायी मुद्दा भी नहीं है। इन मामलों को सड़कों की तुलना में अदालतों में निपटाना बेहतर है, और हर स्तर पर नए कानूनों की जरूरत है, लेकिन अकेले कानून पुरुषों को सही नहीं देख सकता है।

हम मुख्य रूप से एक नैतिक मुद्दे का सामना कर रहे हैं। यह शास्त्रों जितना ही पुराना है और अमेरिकी संविधान जितना ही स्पष्ट है।

सवाल का दिल यह है कि क्या सभी अमेरिकियों को समान अधिकार और समान अवसर दिए जाने हैं, क्या हम अपने साथी अमेरिकियों के साथ वैसा ही व्यवहार करने जा रहे हैं जैसा हम चाहते हैं। यदि एक अमेरिकी, क्योंकि उसकी त्वचा का रंग सांवला है, जनता के लिए खुले रेस्तरां में दोपहर का भोजन नहीं कर सकता है, यदि वह अपने बच्चों को उपलब्ध सर्वोत्तम पब्लिक स्कूल में नहीं भेज सकता है, यदि वह सार्वजनिक अधिकारियों को वोट नहीं दे सकता है जो उसका प्रतिनिधित्व करते हैं, यदि, संक्षेप में , वह उस पूर्ण और मुक्त जीवन का आनंद नहीं ले सकता जो हम सभी चाहते हैं, तो हम में से कौन अपनी त्वचा का रंग बदल कर उसकी जगह पर खड़ा होने के लिए संतुष्ट होगा? तब हम में से कौन सब्र और विलम्ब की सलाहों से सन्तुष्ट होगा?

राष्ट्रपति लिंकन को दासों को मुक्त किए हुए सौ साल बीत चुके हैं, फिर भी उनके उत्तराधिकारी, उनके पोते, पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं हैं। वे अभी भी अन्याय के बंधन से मुक्त नहीं हुए हैं। वे अभी भी सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न से मुक्त नहीं हुए हैं। और यह राष्ट्र, अपनी सारी आशाओं और अपने सभी घमंडों के बावजूद, तब तक पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होगा जब तक कि इसके सभी नागरिक स्वतंत्र न हों।

हम दुनिया भर में स्वतंत्रता का प्रचार करते हैं, और हमारा मतलब है, और हम यहां अपनी स्वतंत्रता को घर पर संजोते हैं, लेकिन क्या हम दुनिया से कह सकते हैं, और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नीग्रो को छोड़कर मुक्त की भूमि है ; कि हमारे पास नीग्रो के अलावा कोई द्वितीय श्रेणी का नागरिक नहीं है; कि नीग्रो के संबंध में हमारे पास कोई वर्ग या जाति व्यवस्था नहीं है, कोई यहूदी बस्ती नहीं है, कोई मास्टर जाति नहीं है?

अब समय आ गया है कि इस देश को अपना वादा पूरा करना चाहिए। बर्मिंघम और अन्य जगहों की घटनाओं ने समानता के लिए रोष को इतना बढ़ा दिया है कि कोई भी शहर या राज्य या विधायी निकाय समझदारी से उनकी उपेक्षा करने का विकल्प नहीं चुन सकता है।

उत्तर और दक्षिण हर शहर में हताशा और कलह की आग जल रही है, जहां कानूनी उपाय हाथ में नहीं हैं। सड़कों पर, प्रदर्शनों, परेडों और विरोध प्रदर्शनों में निवारण मांगा जाता है जो तनाव पैदा करते हैं और हिंसा की धमकी देते हैं और जीवन को खतरे में डालते हैं।

इसलिए, हम एक देश के रूप में और एक लोगों के रूप में एक नैतिक संकट का सामना करते हैं। इसे दमनकारी पुलिस कार्रवाई से पूरा नहीं किया जा सकता है। इसे सड़कों पर बढ़े हुए प्रदर्शनों पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसे सांकेतिक चाल या बात से शांत नहीं किया जा सकता है। यह कांग्रेस में, आपके राज्य और स्थानीय विधायी निकाय में और सबसे बढ़कर, हमारे दैनिक जीवन में कार्य करने का समय है।

केवल दूसरों पर दोष मढ़ देना, यह कहना कि यह देश के किसी एक वर्ग या किसी अन्य की समस्या है, या इस तथ्य पर खेद व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है जिसका हम सामना कर रहे हैं। एक महान परिवर्तन हाथ में है, और हमारा कार्य, हमारा दायित्व, उस क्रांति को, उस परिवर्तन को, सभी के लिए शांतिपूर्ण और रचनात्मक बनाना है।

जो कुछ नहीं करते वे शर्म के साथ-साथ हिंसा को भी आमंत्रित कर रहे हैं। जो लोग साहसपूर्वक कार्य करते हैं वे सही के साथ-साथ वास्तविकता को भी पहचान रहे हैं।

अगले हफ्ते मैं संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस से कार्य करने के लिए कहूँगा, एक प्रतिबद्धता बनाने के लिए जो उसने इस सदी में पूरी तरह से इस प्रस्ताव के लिए नहीं की है कि अमेरिकी जीवन या कानून में नस्ल का कोई स्थान नहीं है। संघीय न्यायपालिका ने स्पष्ट मामलों की एक श्रृंखला में उस प्रस्ताव को बरकरार रखा है। कार्यकारी शाखा ने अपने मामलों के संचालन में उस प्रस्ताव को अपनाया है, जिसमें संघीय कर्मियों के रोजगार, संघीय सुविधाओं का उपयोग और संघ द्वारा वित्तपोषित आवास की बिक्री शामिल है।

लेकिन अन्य आवश्यक उपाय हैं जो केवल कांग्रेस ही प्रदान कर सकती है, और उन्हें इस सत्र में प्रदान किया जाना चाहिए। इक्विटी कानून का पुराना कोड जिसके तहत हम हर गलत के लिए एक उपाय के लिए आदेश देते हैं, लेकिन बहुत सारे समुदायों में, देश के कई हिस्सों में, नीग्रो नागरिकों पर गलतियां की जाती हैं और कानून में कोई उपाय नहीं है। जब तक कांग्रेस कार्रवाई नहीं करती, उनका एकमात्र उपाय सड़क पर है।

इसलिए, मैं कांग्रेस से सभी अमेरिकियों को सार्वजनिक-होटल, रेस्तरां, थिएटर, खुदरा स्टोर और इसी तरह के प्रतिष्ठानों के लिए खुली सुविधाओं में सेवा करने का अधिकार देने के लिए कानून बनाने के लिए कह रहा हूं।

यह मुझे प्राथमिक अधिकार प्रतीत होता है। इसका इनकार एक मनमाना आक्रोश है जिसे 1963 में किसी भी अमेरिकी को सहन नहीं करना चाहिए था, लेकिन कई लोग करते हैं।

मैंने हाल ही में कई व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की है और उनसे इस भेदभाव को समाप्त करने के लिए स्वैच्छिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है और मुझे उनकी प्रतिक्रिया से प्रोत्साहित किया गया है, और पिछले 2 हफ्तों में 75 से अधिक शहरों ने इस प्रकार की सुविधाओं को अलग करने में प्रगति देखी है। लेकिन कई अकेले कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं, और इस कारण से, देशव्यापी कानून की जरूरत है अगर हमें इस समस्या को सड़कों से अदालतों तक ले जाना है।

मैं कांग्रेस से संघीय सरकार को सार्वजनिक शिक्षा में अलगाव को समाप्त करने के लिए तैयार किए गए मुकदमों में पूरी तरह से भाग लेने के लिए अधिकृत करने के लिए भी कह रहा हूं। हम कई जिलों को स्वेच्छा से अलग करने के लिए राजी करने में सफल रहे हैं। दर्जनों ने नीग्रो को बिना हिंसा के अपनाया है। आज हमारे 50 राज्यों में से प्रत्येक में एक नीग्रो राज्य समर्थित संस्थान में भाग ले रहा है, लेकिन गति बहुत धीमी है।

9 साल पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय अलग-अलग ग्रेड के स्कूलों में प्रवेश करने वाले बहुत से नीग्रो बच्चे इस गिरावट में अलग-अलग हाई स्कूलों में प्रवेश करेंगे, एक ऐसा नुकसान हुआ है जिसे कभी बहाल नहीं किया जा सकता है। पर्याप्त शिक्षा की कमी नीग्रो को वोट देने का मौका नहीं देती है। लेकिन कानून, मैं दोहराता हूं, इस समस्या को अकेले हल नहीं कर सकता। इसे हमारे देश भर में हर समुदाय में हर अमेरिकी के घरों में हल किया जाना चाहिए।

इस संबंध में, मैं उत्तर और दक्षिण के उन नागरिकों को श्रद्धांजलि देना चाहता हूं जो सभी के लिए जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने समुदायों में काम कर रहे हैं। वे कानूनी कर्तव्य की भावना से नहीं बल्कि मानवीय शालीनता की भावना से काम कर रहे हैं।

दुनिया के सभी हिस्सों में हमारे सैनिकों और नाविकों की तरह वे फायरिंग लाइन पर स्वतंत्रता की चुनौती का सामना कर रहे हैं, और मैं उनके सम्मान और उनके साहस के लिए उन्हें सलाम करता हूं।

मेरे साथी अमेरिकियों, यह एक ऐसी समस्या है जो उत्तर के साथ-साथ दक्षिण के हर शहर में हम सभी के सामने है। आज नीग्रो बेरोजगार हैं, गोरों की तुलना में दो या तीन गुना अधिक, शिक्षा में अपर्याप्त, बड़े शहरों में जा रहे हैं, काम खोजने में असमर्थ हैं, युवा लोग विशेष रूप से आशा के बिना काम से बाहर हैं, समान अधिकारों से वंचित हैं, खाने के अवसर से वंचित हैं एक रेस्तरां या लंच काउंटर या एक मूवी थियेटर में जाना, एक अच्छी शिक्षा के अधिकार से वंचित, योग्य होने के बावजूद लगभग आज राज्य विश्वविद्यालय में भाग लेने के अधिकार से वंचित। मुझे ऐसा लगता है कि ये ऐसे मामले हैं जो हम सभी से संबंधित हैं, न केवल राष्ट्रपति या कांग्रेसी या राज्यपाल, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रत्येक नागरिक।

यह एक देश है। यह एक देश बन गया है क्योंकि हम सभी को और यहां आने वाले सभी लोगों को अपनी प्रतिभा विकसित करने का समान अवसर मिला है।

हम १० प्रतिशत आबादी से यह नहीं कह सकते कि आपके पास वह अधिकार नहीं है; कि आपके बच्चों में जो भी प्रतिभा है उसे विकसित करने का मौका नहीं मिल सकता है; कि उन्हें अपना अधिकार प्राप्त करने का एकमात्र तरीका सड़कों पर उतरना और प्रदर्शन करना है। मुझे लगता है कि हम उन पर कर्जदार हैं और हम खुद को उससे बेहतर देश मानते हैं।

इसलिए, हम आपके लिए आगे बढ़ना आसान बनाने और उपचार की समानता प्रदान करने के लिए जो हम स्वयं चाहते हैं, प्रदान करने के लिए मैं आपकी सहायता मांग रहा हूं; हर बच्चे को उसकी प्रतिभा की सीमा तक शिक्षित होने का मौका देना।

जैसा कि मैंने पहले कहा है, हर बच्चे के पास समान प्रतिभा या समान क्षमता या समान प्रेरणा नहीं होती है, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा और अपनी क्षमता और अपनी प्रेरणा को विकसित करने, खुद के लिए कुछ बनाने का समान अधिकार होना चाहिए।

हमें यह उम्मीद करने का अधिकार है कि नीग्रो समुदाय जिम्मेदार होगा, कानून को बनाए रखेगा, लेकिन उन्हें यह उम्मीद करने का अधिकार है कि कानून निष्पक्ष होगा, कि संविधान रंगहीन होगा, जैसा कि जस्टिस हारलन ने कहा था। सदी।

हम इसी के बारे में बात कर रहे हैं और यह एक ऐसा मामला है जो इस देश से संबंधित है और इसका क्या मतलब है, और इसे पूरा करने में मैं अपने सभी नागरिकों का समर्थन मांगता हूं।

आपका बहुत बहुत धन्यवाद


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नागरिक अधिकार नेता जेम्स किसान से जेएफके को एक पत्र पढ़ें: प्रिय जेएफके, फ्रीडम राइडर्स अलग-अलग गहरे दक्षिण में सार्वजनिक बसों की सवारी करेंगे।

सौजन्य जॉन एफ कैनेडी लाइब्रेरी फाउंडेशन


तैयारी

  • अलंकारिक तरीकों की पहचान करें।
  • राष्ट्रपति कैनेडी के जून ११, १९६३ में प्रेरक तकनीकों की जांच करें नागरिक अधिकारों पर अमेरिकी लोगों को रेडियो और टेलीविजन रिपोर्ट.
  • भाषण की सामग्री पर चर्चा करें।
  • भाषण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।

सामग्री (डाउनलोड करने योग्य पीडीएफ में शामिल)

  1. पढ़ना: "राष्ट्रपति कैनेडी के जून ११, १९६३ में प्रेरक शक्ति नागरिक अधिकारों पर अमेरिकी लोगों को रेडियो और टेलीविजन रिपोर्ट"(डाउनलोड करने योग्य पाठ योजना के साथ) (समय: 13:27)
  2. "अनुनय के तरीके" हैंडआउट (डाउनलोड करने योग्य पाठ योजना के साथ शामिल)
  3. उत्तर के साथ "अनुनय के तरीके" हैंडआउट (डाउनलोड करने योग्य पाठ योजना के साथ शामिल)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

हालांकि कैनेडी और निक्सन के बीच 1960 का चुनाव बहुत करीब था, पूरे देश में, 70 प्रतिशत से अधिक अफ्रीकी अमेरिकियों ने कैनेडी के लिए मतदान किया। इन वोटों ने कई प्रमुख राज्यों में जीत की बढ़त प्रदान की। जब जनवरी 1961 में राष्ट्रपति कैनेडी ने पदभार संभाला, तो अफ्रीकी अमेरिकियों को नए प्रशासन से बहुत उम्मीदें थीं।

लेकिन 1960 में कैनेडी की संकीर्ण चुनावी जीत और कांग्रेस में दक्षिणी अलगाववादी डेमोक्रेट्स की शक्ति ने उन्हें नागरिक अधिकारों के बारे में सतर्क कर दिया। नागरिक अधिकार कानून के लिए कड़ी मेहनत करने के बजाय, उन्होंने उच्च-स्तरीय पदों पर अभूतपूर्व संख्या में अफ्रीकी अमेरिकियों को नियुक्त किया और कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिन्होंने समान रोजगार अवसर पर राष्ट्रपति की समिति की स्थापना की और संघ द्वारा वित्त पोषित आवास में भेदभाव को प्रतिबंधित किया। 28 फरवरी, 1963 को, कैनेडी ने नागरिक अधिकारों पर कांग्रेस को एक विशेष संदेश प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस को कानून बनाने के लिए कहा जिसमें सीमित नागरिक अधिकार उपाय शामिल थे जैसे कि मतदान अधिकार कानूनों को मजबूत करना और उन स्कूलों के लिए सहायता प्रदान करना जो स्वेच्छा से अलग हो रहे थे।

1963 के वसंत तक, कैनेडी का ध्यान नागरिक अधिकारों पर तेजी से केंद्रित हो गया। नागरिक अधिकारों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए उनका विकास, बड़े पैमाने पर, नागरिक अधिकारों के प्रदर्शनों की बढ़ती संख्या और आकार और अलगाववादियों से हिंसक प्रतिक्रिया से प्रेरित था। 1963 में अलबामा में बर्मिंघम अभियान ने कुत्तों द्वारा हमला किए गए बच्चों की छवियों के साथ राष्ट्रीय समाचार बनाया और उच्च दबाव वाली आग की नली से विस्फोट किया। कैनेडी प्रशासन समझ गया कि मजबूत नागरिक अधिकार कानून आवश्यक था।

जब यह स्पष्ट हो गया कि दो अफ्रीकी-अमेरिकी कॉलेज के छात्रों के पंजीकरण को रोकने के लिए 11 जून को गवर्नर जॉर्ज वालेस अलबामा विश्वविद्यालय के पंजीकरण भवन के द्वार पर खड़े होंगे, तो राष्ट्रपति कैनेडी ने महसूस किया कि राष्ट्र के नागरिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, समय कानून की आवश्यकता के बारे में राष्ट्र से बात करना सही था।

उस शाम भाषण देने का निर्णय अचानक ही लिया गया था। हालांकि नागरिक अधिकार कानून कई हफ्तों से काम कर रहा था, फिर भी यह प्रक्रिया में था। राष्ट्रपति कैनेडी के विशेष वकील और प्राथमिक भाषण लेखक थिओडोर सोरेनसेन ने उस दोपहर तक भाषण का पहला मसौदा शुरू नहीं किया था। भाषण से एक घंटे पहले, राष्ट्रपति कैनेडी, अटॉर्नी जनरल रॉबर्ट कैनेडी, सहायक अटॉर्नी जनरल बर्क मार्शल और सोरेनसेन भाषण के कुछ हिस्सों को इकट्ठा और पुनर्लेखन कर रहे थे, और राष्ट्रपति कैनेडी के पास एक पूर्ण संस्करण नहीं था जब वह टेलीविजन कैमरे के सामने बैठे थे। शाम के 8:00 बजे उन्होंने भाषण के अंतिम पैराग्राफ को एक्सटेम्पोराइज़ किया।

अपने भाषण में, राष्ट्रपति ने अलगाव के प्रयासों के बाद अलबामा विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा की धमकियों और न्याय में बाधा का जवाब दिया, यह समझाते हुए कि संयुक्त राज्य की स्थापना इस सिद्धांत पर की गई थी कि सभी पुरुषों को समान बनाया गया है और इस प्रकार, सभी अमेरिकी छात्र हकदार हैं जाति की परवाह किए बिना सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों में भाग लेने के लिए। उन्होंने यह भी चर्चा की कि भेदभाव शिक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे प्रभावित करता है, यह देखते हुए कि देश घरेलू स्तर पर इसे अनदेखा करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता का प्रचार नहीं कर सकता। राष्ट्रपति ने कांग्रेस से सभी अमेरिकियों के मतदान अधिकारों, कानूनी स्थिति, शैक्षिक अवसरों और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच की रक्षा करने वाले कानून बनाने के लिए कहा, लेकिन यह माना कि अकेले कानून नस्ल संबंधों से संबंधित देश की समस्याओं को हल नहीं कर सकता।

इस पाठ में, छात्र इस ऐतिहासिक भाषण में राष्ट्रपति कैनेडी द्वारा उपयोग किए गए अनुनय के तरीकों पर विचार करेंगे और मूल्यांकन करेंगे कि भाषण को कैसे मजबूत किया गया होगा।


राष्ट्रपति लिंकन ने गेटिसबर्ग को संबोधित किया

19 नवंबर, 1863 को, अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान, गेटिसबर्ग, पेंसिल्वेनिया में एक सैन्य कब्रिस्तान के समर्पण पर, राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन अमेरिकी इतिहास में सबसे यादगार भाषणों में से एक देते हैं। 275 से भी कम शब्दों में, लिंकन ने शानदार ढंग से और गतिशील रूप से एक युद्ध-थके हुए जनता को याद दिलाया कि संघ को गृहयुद्ध क्यों लड़ना था, और जीतना था।

गेटिसबर्ग की लड़ाई, लगभग चार महीने पहले लड़ी गई, गृहयुद्ध की सबसे खूनी लड़ाई थी। तीन दिनों के दौरान, ४५,००० से अधिक लोग मारे गए, घायल हुए, पकड़े गए या लापता हो गए। युद्ध भी युद्ध का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ: जनरल रॉबर्ट ई. ली की हार और गेटिसबर्ग से पीछे हटना उत्तरी क्षेत्र के अंतिम संघीय आक्रमण और दक्षिणी सेना के अंतिम पतन की शुरुआत को चिह्नित करता है।

पेंसिल्वेनिया के गवर्नर एंड्रयू कर्टिन द्वारा गेटिसबर्ग मृतकों की देखभाल के लिए आरोप लगाया गया, डेविड विल्स नामक एक वकील ने युद्ध में गिरे 7,500 से अधिक लोगों के लिए कब्रिस्तान में बदलने के लिए 17 एकड़ चारागाह खरीदा। विल्स ने उस दिन के सबसे प्रसिद्ध वक्ता एडवर्ड एवरेट को कब्रिस्तान के समर्पण पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया। लगभग एक विचार के रूप में, विल्स ने समारोह से ठीक दो सप्ताह पहले लिंकन को एक पत्र भी भेजा था जिसमें मैदान को पवित्र करने के लिए 'कुछ उपयुक्त टिप्पणियों' का अनुरोध किया गया था।

समर्पण के समय, लिंकन के बोलने से पहले भीड़ ने एवरेट को दो घंटे तक सुना। लिंकन का संबोधन सिर्फ दो या तीन मिनट तक चला। भाषण ने उनके पुनर्परिभाषित विश्वास को प्रतिबिंबित किया कि गृहयुद्ध केवल संघ को बचाने के लिए लड़ाई नहीं थी, बल्कि सभी के लिए स्वतंत्रता और समानता के लिए संघर्ष था, एक विचार लिंकन ने युद्ध के लिए अग्रणी वर्षों में चैंपियन नहीं किया था। यह उनका उत्साहजनक निष्कर्ष था: “दुनिया कम ध्यान देगी, और न ही लंबे समय तक याद रखेगी कि हम यहां क्या कहते हैं, लेकिन यह कभी नहीं भूल सकता कि उन्होंने यहां क्या किया। यह हमारे लिए जीवित है, बल्कि, यहां अधूरे काम के लिए समर्पित होना है, जो वे यहां लड़े थे, अब तक इतनी अच्छी तरह से आगे बढ़े हैं। बल्कि यह हमारे लिए है कि हम यहां हमारे सामने बचे हुए महान कार्य के लिए समर्पित हों - इन सम्मानित मृतकों में से हम उस कारण के प्रति अधिक भक्ति लेते हैं जिसके लिए उन्होंने भक्ति का अंतिम पूर्ण उपाय दिया था - हम यहां दृढ़ता से संकल्प करते हैं कि ये मृत नहीं होंगे व्यर्थ मर गए हैं कि यह राष्ट्र, ईश्वर के अधीन, स्वतंत्रता का एक नया जन्म होगा & # x2014 और लोगों की सरकार, लोगों द्वारा, लोगों के लिए, पृथ्वी से नष्ट नहीं होगी। & # x201D


जॉन एफ कैनेडी का नागरिक अधिकार पता विश्लेषण ड्राफ्ट

क्या आप सोच सकते हैं कि अगर अमेरिका में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार नहीं होते? सौभाग्य से, आज का समाज ऐसा नहीं है। हालांकि, १९५० और #८२१७ के दशक के अंत और १९६० और #८२१७ के दशक के प्रारंभ में एक समय था जब नागरिक अधिकार आंदोलन छिड़ गया था। एक-दूसरे से अलग नाराज़ लोगों के कई समूह उन अधिकारों के लिए लड़ने के लिए एक साथ आए, जिनके वे हकदार थे। अफ्रीकी अमेरिकियों ने सार्वजनिक स्थानों पर अलगाव के खिलाफ आवाज उठाई, महिलाओं ने दोनों लिंगों के लिए समान वेतन पर ध्यान दिया, और कई अन्य संस्कृतियों ने भी अपने अधिकारों के बारे में तर्क दिया। यह एक ऐसा समय था जब गोरे लोगों के साथ देश में हर किसी से बेहतर व्यवहार किया जाता था। अपने अधिकारों के लिए रोने वाले कई अमेरिकियों को उनके लिए बोलने और पूरे देश को मनाने के लिए एक शक्तिशाली, प्रभावशाली नेता की आवश्यकता थी कि सभी को समान होना चाहिए चाहे वे कोई भी हों। हम सभी ने इस संबोधन के बारे में सुना है, हालांकि शायद इतिहास की कक्षा में जहां मैंने पहली बार इसके बारे में सुना था। पूर्व राष्ट्रपति, जॉन एफ कैनेडी ने कदम बढ़ाया और नागरिक अधिकारों से संबंधित एक महान भाषण के साथ रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया।

भाषण यूएस नेशनल गार्ड के जवाब में दिया गया था जिसे अलबामा विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले अफ्रीकी अमेरिकी छात्रों की सुरक्षा के लिए भेजा गया था। इन छात्रों को उनकी जाति के कारण धमकाया और परेशान किया जा रहा था। यह सोचना हास्यास्पद है कि जो छात्र उचित शिक्षा के योग्य थे, उन्हें उनके कॉलेज में ले जाना पड़ा। इससे पता चलता है कि हमारा देश कभी कितना अन्यायी था। अफ्रीकी अफ्रीकियों के साथ भेदभाव केवल अन्यायपूर्ण था।

जॉन एफ कैनेडी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विभिन्न समूहों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, जिनके साथ वैसा व्यवहार नहीं किया जा रहा था जैसा उनके साथ किया जाना चाहिए था। 11 जून 1963 को, कैनेडी ने उन समूहों की ओर से एक शक्तिशाली भाषण दिया, जिन्हें सुनने की सख्त जरूरत थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सभी को समान बनाया गया था और उन्हें समान अधिकार साझा करना चाहिए, यह कहते हुए, "मुझे आशा है कि हर अमेरिकी, चाहे वह कहीं भी रहता हो, रुक जाएगा और इस और अन्य संबंधित घटनाओं के बारे में अपने विवेक की जांच करेगा। इस राष्ट्र की स्थापना कई राष्ट्रों और पृष्ठभूमि के पुरुषों द्वारा की गई थी। यह इस सिद्धांत पर स्थापित किया गया था कि सभी पुरुषों को समान बनाया जाता है, और जब एक व्यक्ति के अधिकारों को खतरा होता है तो प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार कम हो जाते हैं।" उन्होंने मतदान, पृथक शिक्षा, कार्य और उपचार के मुद्दों को संबोधित किया। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों और उनके द्वारा दिए गए बयानों ने लाखों लोगों के दिमाग में छाप छोड़ी। यह उनका संदेश था जो अमेरिका और कांग्रेस को निर्देशित किया गया था जिसने नागरिक अधिकार आंदोलन में एक अंतर लाने में मदद की जिसे हमेशा याद किया जाएगा।

कैनेडी के पास बोलने का इतना प्रभावी तरीका था। जब वे बोलते थे तो लोकाचार, लोगो और पाथोस स्पष्ट रूप से सामने आते थे। कैनेडी के लोकाचार को सभी अमेरिकियों के लिए उपयुक्त भाषा के साथ बोलने पर प्रदर्शित किया गया था और जब उन्होंने राष्ट्र के सामने जो पेश किया था उसमें विशेषज्ञता दिखाई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से खुद को इस तरह से प्रस्तुत किया जिससे उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि वे ऐसे शब्दों से भरे हुए हैं जो बुद्धिमान और अर्थपूर्ण थे। उनके बोलने ने उनके मूल मूल्यों को निर्धारित किया क्योंकि वह यह कहते हुए सबके सामने खड़े थे कि उनकी त्वचा के रंग या उनकी जाति के आधार पर लोगों के साथ अलग व्यवहार करना गलत है। उन्होंने अपनी बड़ी चिंताओं के बारे में बोलने के लिए समय निकालकर खुद को वास्तविक और सम्मानजनक के रूप में चित्रित किया, जैसे कि जब उन्होंने अलग-अलग स्कूलों के कारण अपर्याप्त शिक्षा से पीड़ित अफ्रीकी अमेरिकी बच्चों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए एक अच्छी नौकरी पाने का मौका मिलना मुश्किल था क्योंकि शिक्षा के संबंध में उन्हें जो स्थिति मिली थी। वह अलगाव को समाप्त करने के लिए कांग्रेस का आह्वान करने में सम्मानजनक थे। उन्होंने किसी भी अभद्र या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया, उन्होंने बस इस मुद्दे को समझाया और बदलाव के लिए कहा। उनके लहज़े में जो शांति थी, उससे पता चलता है कि बदलाव लाने के उनके प्रयास में शांति थी। उन सभी लक्षणों के साथ, जो कैनेडी ने जनता के सामने प्रदर्शित किए, जो मेरे लिए सबसे अलग था, वह था सभी अमेरिकियों के प्रति उनकी निष्ठा। उन्होंने अपने संबोधन में इस देश के सभी लोगों को पहचाना और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरे दिल से प्रतिबद्ध थे कि वे स्वतंत्र और खुशी से रह सकें। कैनेडी ने जनता को सूचित करके अपनी सच्ची निष्ठा दिखाई है कि उन्होंने "हाल ही में कई व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की है, जो उनसे इस भेदभाव को समाप्त करने के लिए स्वैच्छिक कार्रवाई करने का आग्रह कर रहे हैं, और मुझे उनकी प्रतिक्रिया से प्रोत्साहित किया गया है, और पिछले दो हफ्तों में 75 से अधिक शहरों में इस प्रकार की सुविधाओं को अलग-अलग करने में प्रगति देखी गई है। लेकिन कई अकेले कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं, और इस कारण से, देशव्यापी कानून की जरूरत है अगर हमें इस समस्या को सड़कों से अदालत तक ले जाना है। इस भाषण में कैनेडी के लोकाचार ने उन्हें सभी लोगों के लिए मजबूत मूल्यों और वास्तविक देखभाल के साथ एक शक्तिशाली, सम्मानित वक्ता के रूप में प्रस्तुत किया।

अपने भाषण में एक महान लोकाचार होने के अलावा, कैनेडी के लोगो ने नागरिक अधिकारों पर जोर देने पर राष्ट्र को आश्वस्त किया। कैनेडी ने जो तर्क और तर्क पेश किए, उससे साबित हो गया कि अमेरिका को देश को बेहतर बनाने के लिए बदलाव करने की जरूरत है। एक आधिकारिक स्वर में, कैनेडी ने अश्वेतों और गोरों के बीच के अंतर पर चर्चा की। उन्होंने दावा किया, "आज, हम उन सभी के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए एक विश्वव्यापी संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं जो स्वतंत्र होना चाहते हैं। और जब अमेरिकियों को वियतनाम या पश्चिम बर्लिन भेजा जाता है, तो हम केवल गोरे नहीं मांगते। यह कथन पूरी तरह से सच है क्योंकि अमेरिकी नागरिकों को देश के अंदर की दौड़ से अलग करने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन सभी जातियों को समुद्र के पार लड़ाई में एक साथ लड़ने की अनुमति है। यदि सभी पुरुषों का मसौदा तैयार किया जा सकता है तो सभी पुरुषों को सभी स्थितियों में एक दूसरे के बराबर होना चाहिए, न कि केवल युद्ध में। कैनेडी ने सभी राष्ट्रीयताओं का समर्थन करने के लिए लोगो का ठीक से उपयोग किया। यदि सभी को समान जिम्मेदारी दी जाए तो समान अधिकार तार्किक होने चाहिए।

अंत में तीन अलंकारिक अपीलों में से, पाथोस संबोधन में भावनात्मक अपील करता है। कैनेडी ने अमेरिकियों को उनकी भावनाओं से अपील करके नागरिक अधिकारों में शामिल होने के लिए राजी किया। उनका बयान, "जो कुछ नहीं करते हैं वे शर्म के साथ-साथ हिंसा को भी आमंत्रित कर रहे हैं। जो लोग साहसपूर्वक कार्य करते हैं, वे सही और साथ ही वास्तविकता को पहचान रहे हैं, हमें दिखाता है कि कैनेडी चाहते थे कि देश यह पहचाने कि यदि वे खड़े होकर अपने साथी नागरिकों को नागरिक अधिकारों के बारे में कुछ भी किए बिना बहस करते हुए देखते हैं, तो वे शर्मसार होंगे शांति में उन अशांति को जारी रखने की अनुमति देकर अपने स्वयं के राष्ट्र। बेशक, कोई भी वापस बैठने और शांति को नष्ट करने के लिए दोषी महसूस नहीं करना चाहता। कैनेडी के संबोधन में उस पंक्ति ने अमेरिकियों को अपने समाज में चल रहे मुद्दों के बारे में कुछ करने के लिए प्रोत्साहित किया। कैनेडी ने पाथोस का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया। साथ ही, अफ्रीकी अमेरिकियों के दैनिक आधार पर संघर्ष की कल्पना प्रदान करके भाषण सुनने वालों के मन में सहानुभूति पैदा हुई। कैनेडी ने "पीड़ित" और "अन्याय" जैसे शब्दों का इस्तेमाल अमेरिकियों को उन लोगों के लिए बुरा महसूस कराने के लिए किया जो नागरिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों से नकारात्मक रूप से प्रभावित हैं। इस तरह की मजबूत भावनात्मक अपील सभी से चिंता का विषय बनाने में उपयोगी थी।

इसके अतिरिक्त, यह बहुत ध्यान देने योग्य था कि राष्ट्रपति कैनेडी ने अपने भाषण में बहुत अधिक दोहराव का इस्तेमाल किया। राष्ट्रपति के लिए, यह बयानबाजी का उपयोग करने का एक प्रभावी तरीका था। कैनेडी ने वाक्यांश का प्रयोग किया, "”यह संभव होना चाहिए" यह बताने के लिए कि एक राष्ट्र को सभी के लिए समान और निष्पक्ष बनाना संभव है। दावा, "किसी भी रंग के अमेरिकी नागरिकों के लिए पंजीकरण करना और बिना किसी हस्तक्षेप या प्रतिशोध के डर के स्वतंत्र चुनाव में मतदान करना संभव होना चाहिए," "इसलिए, किसी भी रंग के अमेरिकी छात्रों के लिए किसी भी रंग में भाग लेने के लिए यह संभव होना चाहिए। सार्वजनिक संस्थान जिसे वे सेना द्वारा समर्थित किए बिना चुनते हैं" और "यह किसी भी रंग के अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए सार्वजनिक आवास के स्थानों में समान सेवा प्राप्त करने के लिए संभव होना चाहिए," यह प्रदर्शित करने में इतने शक्तिशाली हैं कि वास्तव में एक तरीका है इन साधारण अधिकारों को अमेरिकी समाज का हिस्सा बनाने के लिए। कैनेडी ने इस राष्ट्र को एक ऐसे देश के रूप में वर्णित किया है जो "इस सिद्धांत पर आधारित है कि सभी पुरुषों को समान बनाया गया है।" उन्होंने दोहराया कि अब्राहम लिंकन ने पहले जो कहा था, उसे स्पष्ट करने के लिए, इस तथ्य को कुछ भी नहीं बदलता है कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। इन वाक्यांशों में दोहराव वास्तव में अमेरिकियों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु प्राप्त करने में सहायक था।

अंत में, जॉन एफ कैनेडी अपने भाषण के दौरान अपनी अलंकारिक रणनीतियों में लोकाचार, लोगो और पाथोस का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं। ये तीनों अलंकारिक दृष्टिकोण एक साथ एक साथ आए, जिसे मैं एक सफल मानता हूं। उनके वाक्यांशों की पुनरावृत्ति के साथ-साथ अलंकारिक अपीलों के उपयोग ने वास्तव में एक महान भाषण दिया। नागरिक अधिकारों का उनका प्रचार उस भाषण के बाद समाप्त नहीं हुआ। इसके बजाय, यह अमेरिकी जीवन में एक भूमिका निभाता रहा और यहां तक ​​कि राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन द्वारा भी किया गया।

एक टिप्पणी

मिशेल बिंगर्ट का निबंध सुधार

हम ध्यान देने योग्य कुछ सामान्य बातों के साथ शुरुआत करेंगे। आप वास्तव में इस निबंध में 'मैं' का उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि यह एक औपचारिक निबंध है जिसे आप "मुझे लगता है" या "मुझे विश्वास है" नहीं कह सकते (साथ ही, आप निबंध लिख रहे हैं, इसलिए हम यह मानने जा रहे हैं आप क्या सोचते हैं और वैसे भी विश्वास करते हैं)। मैं ” स्पष्ट रूप से” या “स्पष्ट रूप से” शब्दों का उपयोग करने के बारे में सावधान रहूंगा क्योंकि जो आपके लिए स्पष्ट हो सकता है वह अन्य लोगों के लिए स्पष्ट नहीं हो सकता है। साथ ही, यह आपको ऐसा लगता है जैसे आपको लगता है कि आप दर्शकों की तुलना में अधिक स्मार्ट या बेहतर हैं, जैसे कि उन्हें आपके समान तरंग दैर्ध्य पर सोचना चाहिए। यह एक अलंकारिक विश्लेषण निबंध है इसलिए मैं आपके निबंध में भाषण पर आपकी राय शामिल नहीं करूंगा क्योंकि यह आपको एक पक्षपाती स्रोत के रूप में चिह्नित करता है और पाठक भाषण के आपके विश्लेषण पर भरोसा नहीं करेंगे। यदि आप अपनी राय शामिल करना चाहते हैं, तो मैं इसे आपके निष्कर्ष पर छोड़ दूंगा। आपने शायद, मेरी तरह, कल रात बहुत जल्दी अपना निबंध लिखा था, इसलिए आपको अपना व्याकरण संपादित करना होगा। आपके मसौदे में बिखरे हुए कुछ अजीब वाक्य हैं। यदि आपको उन्हें खोजने में परेशानी हो रही है, तो आपको प्रत्येक पैराग्राफ को जोर से पढ़ना चाहिए और जब कोई वाक्य अजीब लगता है या आपकी जीभ से उतनी आसानी से नहीं छूटती है जितनी आप उम्मीद करते हैं, तो आपको सुधार करना चाहिए। अंत में, जब आप किसी कोट का उपयोग करते हैं, तो आपको अपने दावे के संदर्भ में उस उद्धरण का अर्थ या वारंट को अनपैक करना होगा। आपको यह साबित करना चाहिए कि वह उद्धरण इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि आपको इसे अपने निबंध में शब्द-दर-शब्द शामिल करने की आवश्यकता है, न कि केवल इसे संक्षिप्त करने के लिए।
खास बातें। यह अच्छा हो सकता है यदि आप अपने पहले पैराग्राफ को थीसिस स्टेटमेंट के साथ समाप्त करते हैं, औपचारिक रूप से समझाते हुए कि आप निबंध के साथ कहां जा रहे हैं। आपको अपने विश्लेषण निबंध के माध्यम से हमें जानने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन पाठक को अभी भी यह जानना होगा कि आगे क्या हो रहा है। यह भी बेहतर हो सकता है कि आप अपने दूसरे और तीसरे पैराग्राफ को बदल दें। मुझे लगता है कि यह बेहतर होगा यदि आप भाषण देने वाले व्यक्ति का परिचय दें, और फिर जो वह कह रहा था उसका परिचय दें, न कि इसके विपरीत। यदि आप वर्तमान दूसरे पैराग्राफ में भाषण का अधिक वर्णन करते हैं, और जिस उद्देश्य के लिए इसे दिया गया था, उससे मदद मिलेगी। यदि आप जॉन एफ कैनेडी के बारे में अधिक वर्णन करते हैं तो यह भी मदद करेगा। मुझे पता है कि वह एक प्रमुख ऐतिहासिक शख्सियत हैं, लेकिन हो सकता है कि अगर आपने शोध किया हो तो आप दर्शकों को उनकी पहचान का बेहतर अंदाजा दे सकें। आपके चौथे पैराग्राफ के पहले दो वाक्य आपकी थीसिस का हिस्सा होने चाहिए, और फिर वह तीसरा वाक्य आपके नए चौथे पैराग्राफ के लिए पहला वाक्य होना चाहिए। लोगो पर आपका पाँचवाँ पैराग्राफ नागरिक अधिकारों के बारे में आपकी राय का उपयोग यह साबित करने के लिए करता है कि कैनेडी के भाषण में लोगो शामिल हैं। आप वास्तव में उद्धरण के अर्थ को अनपैक नहीं करते हैं, या कैनेडी अपने भाषण में तर्क का उपयोग कैसे करते हैं। आपका पाँचवाँ पैराग्राफ भाषण के उदाहरणों का भी उपयोग करता है जो आपके दर्शकों को पता नहीं चलेगा कि उन्होंने भाषण नहीं पढ़ा है। आप दोहराव पर उस पैराग्राफ को पथ का एक हिस्सा बनाने में सक्षम हो सकते हैं यदि आप जोड़ते हैं कि कैसे दोहराव या शक्तिशाली वाक्यांश दर्शकों के भीतर भावना या संबंध बनाते हैं।
अब इसे कुछ अच्छी चीजों के साथ सकारात्मक नोट पर समाप्त करने के लिए! भाषण का अच्छा चयन। आपके पास दर्शकों और भाषण के पीछे के इतिहास का विश्लेषण करने के लिए बहुत सारे अवसर होंगे क्योंकि यह प्रसिद्ध है और अमेरिकी इतिहास के सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रपतियों में से एक द्वारा दिया गया था। मुझे तुम्हारा हुक पसंद है। हालांकि यह एक औपचारिक निबंध है और जरूरी नहीं कि यह वाक्य औपचारिक हो, मुझे लगता है कि यह दर्शकों को आकर्षित करता है और आपके निबंध को पढ़ने से पहले उन्हें सोचने पर मजबूर करता है, जो कि अच्छा है। आपका निबंध बहुत व्यवस्थित और अनुसरण करने के लिए स्पष्ट है। आपके पाथोस पैराग्राफ के लिए शब्द चयन का विश्लेषण करने का आपका विचार बहुत अच्छा और प्रासंगिक है। मुझे वास्तव में पसंद है कि आप हमें यह बताकर अपना भाषण कैसे समाप्त करते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। यह भी अच्छा हो सकता है यदि आपने हमें बताया कि कैनेडी के भाषण के दौरान अन्य लोगों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी (ऐसा कुछ नहीं जो आपको करना है, बस अगर आप रुचि रखते हैं)। मुझे पता है कि ऐसा लगता है कि मैंने बहुत आलोचना की है, लेकिन आपका निबंध अच्छी तरह से सामने आ रहा है और जब आप इसमें और विवरण डालेंगे और इसे संपादित करेंगे तो यह बहुत अच्छा होगा। आपको कामयाबी मिले!


नागरिक अधिकारों पर रेडियो और टीवी पता, 6/11/63 - इतिहास

इस भाषण में, कैनेडी उन गुणों का वर्णन करते हैं जिन्हें वह अच्छी, प्रभावी सरकार के लिए आवश्यक मानते हैं।

मैसाचुसेट्स के राष्ट्रमंडल के सामान्य न्यायालय में भाषण

स्टेट हाउस

बोस्टन, मैसाचुसेट्स

9 जनवरी, 1961

मैंने इस ऐतिहासिक निकाय, और आपके माध्यम से मैसाचुसेट्स के लोगों को संबोधित करने के इस अवसर का स्वागत किया है, जिनका मैं जीवन भर की दोस्ती और विश्वास के लिए बहुत गहरा ऋणी हूं।

चौदह वर्षों से मैंने मैसाचुसेट्स के नागरिकों पर अपना विश्वास रखा है - और उन्होंने मुझ पर अपना विश्वास रखकर उदारतापूर्वक प्रतिक्रिया दी है।

अब अगले के बाद शुक्रवार को मुझे नई और व्यापक जिम्मेदारियां निभानी हैं। लेकिन मैं यहां मैसाचुसेट्स को विदाई देने के लिए नहीं हूं।

तैंतालीस वर्षों से - चाहे मैं लंदन, वाशिंगटन, दक्षिण प्रशांत, या कहीं और था - यह मेरा घर रहा है और, ईश्वर की इच्छा से, जहाँ भी मैं सेवा करता हूँ, यह मेरा घर रहेगा।

It was here my grandparents were born--it is here I hope my grandchildren will be born.

I speak neither from false provincial pride nor artful political flattery. For no man about to enter high office can ever be unmindful of the contribution this state has made to our national greatness.

Its leaders have shaped our destiny long before the great republic was born. Its principles have guided our footsteps in times of crisis as well as in times of calm. Its Democratic institutions--including this historic body--have served as beacon lights for other nations as well as our sister states.

For what Pericles said to the Athenians has long been true of this commonwealth: "We do not imitate--for we are a model to others."

And so it is that I carry with me from this state to that high and lonely office to which I now succeed more than fond memories of firm friendships. The enduring qualities of Massachusetts- -the common threads woven by the Pilgram and the Puritan, the fisherman and the farmer, the Yankee and the immigrant-will not and could not be forgotten in this nation's executive mansion.

They are an indelible part of my life, my convictions, my view of the past, and my hopes for the future.

Allow me to illustrate: During the last 60 days, I have been at the task of constructing an administration. It has been a long and deliberate process. Some have counseled greater speed. Others have counseled more expedient tests.

But I have been by the standard John Winthrop set before his shipmates on the flashship Arabella 331 years ago, as they, too, faced the task of building a new government on a perilous frontier.

"We must always consider" he said "that we shall be as a city upon a hill--the eyes of all people are upon us."

Today the eyes of all people are truly upon us--and our governments, in every branch, at every level, national, state and local, must be as a city upon a hill--constructed and inhabited by men aware of their great trust and their great responsibilities.

For we are setting out upon a voyage in 1961 no less hazardous than that undertaken by the Arabella in 1630. We are committing ourselves to tasks of statecraft no less awesome than that of governing the Massachusetts Bay Colony, beset as it was then by terror without and disorder within.

History will not judge our endeavours--and a government cannot be selected--merely on the basis of color or creed or even party affiliation. Neither will competence and loyalty and stature, while essential to the utmost, suffice in times such as these.

For of those to whom much is given, much is required. And when at some future date the high court of history sits in judgement on each one of us--recording whether in our brief span of service we fulfilled our responsibilities to the state--our success or failure, in whatever office we may hold, will be measured by the answers to four questions.

First, were we truly men of courage--with the courage to stand up to one's enemies--and the courage to stand up, when necessary, to one's associates--the courage to resist public pressure, as well as private greed?

Secondly, were we truly men of judgement--with perceptive judgement of the future as well as the past--of our own mistakes as well as the mistakes of others--with enough wisdom to know that we did not know, and enough candor to admit it?

Third, were we truly men of integrity--men who never ran out on either the principles in which they believed or the people who believed in them--men who believed in us--men whom neither financial gain nor political ambition could ever divert from the fulfilment of our sacred trust?

Finally, were we truly men of dedication--with an honor mortgaged to no single individual or group, and compromised by no private obligation or aim, but devoted solely to serving the public good and the national interest.

Courage--judgement--integrity--dedication, these are the historic qualities of the Bay Colony and the Bay State--the qualities which this state has consistantly sent to this chamber on Beacon Hill here in Boston and to Capitol Hill back in Washington.

And these are qualities which, with God's help, this son of Massachusetts hopes will characterize our government's conduct in the four stormy years that lie ahead.

Humbly I ask His help in that undertaking--but aware that on earth His will is worked by men. I ask for your help and your prayers as I embark on this new and solemn journey.


John F. Kennedy - The Presidency

This page is dedicated to the political life of John Fitzgerald Kennedy, in particular, it is devoted to his Presidency. For those of you looking for information on his private life, this page is not directed toward you. Nor is it directed toward those looking for information on the assassination of the President, or any of the theories inspired by that assassination. For any who may be interested in these aspects of the life of John Fitzgerald Kennedy, I will provide a new link at the bottom of each page, and you may find what you seek in those pages.

My goal here is to provide a chronological listing of the political life of President Kennedy. I will do this through his speeches. I will add some brief commentary where appropriate, but I believe John Kennedy made his views and policies very clear in his speeches. This then will be the basic format these pages will follow. I may deviate from this format if I feel adding a certain link, or photo, or any other source will illuminate what is being said in these speeches. I hope you find this page interesting and/or educational. It is indeed a fascinating period in history

Without further delay, the history begins with Kennedy announcing his candidacy for the Presidency.

Statement of Senator John F. Kennedy Announcing His Candidacy for the Presidency of the United States

Senate Caucus Room, Washington, D.C., January 2, 1960

I am announcing today my candidacy for the Presidency of the United States.

The Presidency is the most powerful office in the Free World. Through its leadership can come a more vital life for our people. In it are centered the hopes of the globe around us for freedom and a more secure life. For it is in the Executive Branch that the most crucial decisions of this century must be made in the next four years--how to end or alter the burdensome arms race, where Soviet gains already threaten our very existence--how to maintain freedom and order in the newly emerging nations--how to rebuild the stature of American science and education--how to prevent the collapse of our farm economy and the decay of our cities--how to achieve, without further inflation or unemployment, expanded economic growth benefiting all Americans--and how to give direction to our traditional moral purpose, awakening every American to the dangers and opportunities that confront us.

These are among the real issues of 1960. And it is on the basis of these issues that the American people must make their fateful choice for the future.

In the past 40 months, I have toured every state in the Union and I have talked to Democrats in all walks of life. My candidacy is therefore based on the conviction that I can win both the nomination and the election.

I believe that any Democratic aspirant to this important nomination should be willing to submit to the voters his views, records and competence in a series of primary contests. I am therefore now announcing my intention of filing in the New Hampshire primary and I shall announce my plans with respect to the other primaries as their filing dates approach.

I believe that the Democratic party has a historic function to perform in the winning of the 1960 election, comparable to it's role in 1932. I intend to do my utmost to see that that victory is won.

For 18 years, I have been in the service of the United States, first as a naval Officer in the Pacific during World War II and for the past 14 years as a member of the Congress. In the last 20 years, I have travelled in nearly every continent and country--from Leningrad to Saigon, from Bucharest to Lima. From all of this, I have developed an image of America as fulfilling a noble and historic role as the defender of freedom in a time of maximum peril--and of the American people as confident, courageous and perservering.


Address to the Civil Authorities of Milan

On Saturday afternoon, 2 June [2012], the Holy Father met with the civil and military Authorities and businessmen of Milan in the Throne Room of the Archiepiscopal Residence. The following is a translation of the Pope's Address, which was given in Italian, following Cardinal Scola's welcome.

Distinguished Ladies and Gentlemen,

I sincerely thank you for this meeting which reveals your sentiments of respect and esteem for the Apostolic See. At the same time, it permits me, as Pastor of the universal Church, to express my appreciation to you of the prompt and praiseworthy work you never cease to promote for the ever greater civil, social and economic well-being of the hard-working populations of Milan and Lombardy. I thank Cardinal Angelo Scola who has introduced this event. In addressing my respectful and cordial greeting to you, my thoughts turn to the man who was your illustrious predecessor, St Ambrose, governor — consularis — of the Provinces of Liguria तथा Aemilia, with headquarters in the imperial city of Milan, a crossroads and — as we might say today — a European reference point. Before being elected Bishop of Mediolanum, in an unexpected way and absolutely against his wishes because he felt unprepared, he had been in charge of public order and had administered justice there. The words with which the Prefect Probo invited him as consularis to Milan, told him in fact, “Go and administer, not as a judge but as a bishop”. And he was effectively a balanced and illuminated governor who was able to face matters with wisdom, good sense and authority, knowing how to overcome differences and settle disputes. I would like to reflect briefly on certain principles which he followed and which are still precious for those who are called to govern public affairs.

In his comment on Luke’s Gospel, St Ambrose recalls that “the institution of power so clearly derives from God that the person who exercises it is himself a minister of God” (Expositio Evangelii Secundum Lucam, IV, 29). These words might seem strange to people of the third millennium, and yet they clearly indicate a central truth about the human person which forms the solid foundation of social coexistence: no human power can be considered divine, hence no human being is the master of any other human being. Ambrose courageously reminded the Emperor of this, writing to him, “Even you, august Emperor, are a man” (Epistula 51, 11).

We can draw another element from St Ambrose’s teaching. The first quality of whoever governs is justice, a public virtue par excellence, because it concerns the good of the entire community. And yet it does not suffice. Ambrose accompanies it with another quality: love for freedom, which he considers an element to discriminate between good and bad governors, since, as one reads in another letter of his “the good love freedom, reprobates love servitude” (Epistula 40, 2). Freedom is not a privilege for the few but a right for all, a valuable right which the civil power must guarantee. Yet, freedom does not signify the arbitrary power of the individual but rather implies the responsibility of each one. Herein lies one of the principal elements of the secularism of the State: to guarantee freedom so that all may propose their own vision of common life, always, however, with respect for the other and in the context of the laws that aim for the good of all.

Moreover, to the extent that the concept of a confessional State is out of date, it seems in any case clear that its laws must find justification and force in natural law, which is the basis of an order in conformity with the dignity of the human person, surmounting a merely positivist understanding from which no ethical indication of any kind can be derived (cf. Discourse to the German Parliament, 22 September 2011). The State is at the service of the person whose “well-being” it safeguards in its many aspects, starting with the right to life, whose deliberate suppression may never be permitted. Each one, therefore, can see that legislation and the work of State institutions must be in particular at the service of the family, founded on marriage and open to life, and likewise recognize the primary right of parents to choose how to educate and raise their children, in accordance with the educational programme that they consider valid and suitable. No justice is done to families if the State does not support freedom of education for the common good of the entire society.

In the State’s existence for its citizens, a constructive collaboration with the Church appears to be invaluable. This is certainly not to confuse the different and distinct aims and roles of the civil authority and of the Church herself but for the contribution that the latter has offered and can still offer to society with her experience, her teaching, her tradition, her institutions and her works with which she has placed herself at the service of the people. It suffices to think of the splendid array of Saints devoted to charity, the school and to culture, of the care of the sick and the marginalized, served and loved as the Lord is served and loved. This tradition continues to bear fruit: the diligence of Lombard Christians in these sectors is very much alive and perhaps even more important than in the past. Christian communities promote these actions not so much by supporting them but rather as a freely-given superabundance of Christ’s love and of the totalizing experience of their faith. The period of crisis we are passing through needs free giving, in addition to courageous technological and political decisions, as I have had the opportunity to recall: “The earthly city is promoted not merely by relationships of rights and duties, but to an even greater and more fundamental extent by relationships of gratuitousness, mercy and communion” (Encyclical Caritas in Veritate, एन। ६)।

We can gather yet another precious invitation from St Ambrose, whose solemn and admonitory figure is reproduced on the standard of the City of Milan. St Ambrose asks those who wish to serve in the government and in the public administration to make themselves loved. अपने काम में De Officiis he declares: “what love does can never be achieved by fear. Nothing is as useful as making oneself loved” (II, 29). However, the reason which in turn motivates and stimulates your hard-working and diligent presence in the various spheres of public life cannot but be the will to dedicate yourselves to the good of the citizens, hence a clear expression and an evident sign of love. In this way, politics are deeply ennobled, becoming a lofty form of charity.

Distinguished Ladies and Gentlemen, please accept my simple reflections as a sign of my high esteem for the institutions you serve and for your important work. May you be assisted in your task by the constant protection of Heaven, of which the Apostolic Blessing I impart to you, to your collaborators and to your families, intends to be a pledge and a sign. धन्यवाद।

Taken from:
L'Osservatore Romano
Weekly Edition in English
6 June 2012, page 13


Praising the Confederacy and the KKK

President Woodrow Wilson, seated far left, at the Arlington National Cemetery where Robert E Lee III, grandson and namesake of the Confederate general, speaks at the dedication of a Confederate monument in Arlington, Virginia, 1914. While Wilson’s speech that day focused on national unity, his historical writings have romanticized the Confederacy.

Harris & Ewing/PhotoQuest/Getty Images

Wilson is often associated with the state of New Jersey because that’s where he served as governor and as president of Princeton University. But he was born in antebellum Virginia in 1856 and lived in Georgia during the Civil War. His parents supported the Confederacy, and Wilson’s five-volume history textbook, A History Of The American People, echoes those attitudes. The book adheres to what historians call the “Lost Cause” narrative, a non-factual view of history that romanticizes the Confederacy, describes the institution of slavery as a gentle patrician affair, recasts the Civil War as being about states’ rights instead of slavery and demonizes Reconstruction-era efforts to improve the lives of the formerly enslaved.

Wilson wrote that Reconstruction placed southern white men under “the intolerable burden of governments sustained by the votes of ignorant negroes,” and that those white men responded by forming the Ku Klux Klan. He described the Klan as 𠇊n ‘Invisible Empire of the South,’ bound together in loose organization to protect the southern country from some of the ugliest hazards of a time of revolution.”

In reality, the KKK was a violent terrorist group that targeted Black Americans. Confederate veterans founded the paramilitary group after the Civil War ended in 1865. The first wave of the KKK only disbanded in the early 1870s after President Ulysses S. Grant pushed through laws allowing him to go after it with military force.

White historians like Wilson helped popularize the Confederate Klansmen, who became the heroes of D.W. Griffith’s 1915 film एक राष्ट्र का जन्म. The movie’s villains were Black Americans portrayed by white actors in blackface. Wilson agreed to screen the film—which quoted his own book in its title cards𠅊t the White House.

The blockbuster’s popularity led white men to re-found the KKK, which flourished across the country in the 1920s. Wilson played an active role in promoting the ideology that led to this revival.


Radio and TV Address on Civil Rights, 6/11/63 - History

Affluence and Its Anxieties

The invention of the transistor in 1948 sparked a revolution in electronics, especially in computers. Computer giant International Business Machines (IBM) grew tremendously.

Aerospace industries grew in the 1950s, in large part due to Eisenhower's SAC and to an expanding passenger airline business.

में 1956, the number of "white-collar" (no manual labor) workers exceeded the number of "blue-collar" (manual labor) workers. As a result, union memberships declined.

White-collar jobs opened up opportunities for women. The majority of clerical and service jobs created after 1950 were filled by women. Women's new dual role as a worker and a homemaker raised questions about family life and about traditional definitions of gender roles.

Feminist Betty Friedan published in 1963 The Feminine Mystique, helping to launch the modern women's movement. The book discussed the widespread unhappiness of women who were housewives.

Consumer Culture in the Fifties

The innovations of the credit card, fast-food, and new forms of recreation highlighted the emerging lifestyle of leisure and affluence. In 1946, there were only 6 TV stations, but there were 146 by 1956. "Televangelists" like Baptist Billy Graham used the TV to spread Christianity.

As the population moved west, खेल teams also moved west. लोकप्रिय संगीत was transformed during the 1950s. एल्विस प्रेस्ली created a new style known as rock and roll.

Traditionalists were critical of Presley and many of the social movements during the 1950s.

The Advent of Eisenhower

Lacking public support for Truman, the Democrats nominated Adlai Stevenson के लिए election of 1952 and the Republicans nominated ड्वाइट डी. आइजनहावर. Eisenhower was already well-liked by the public. रिचर्ड एम. निक्सन was chosen for vice-president to satisfy the anticommunist wing of the Republican Party. During this election, TV became a popular medium for campaigning.

During the campaign, Nixon went on TV to defend himself against corruption allegations "Checkers speech".

Eisenhower won the election of 1952 by a large majority.

President Eisenhower attempted to end the Korean War. में July 1953, after Eisenhower threatened to use nuclear weapons, an armistice was signed, ending the Korean War. Despite the Korean War, Korea remained divided at the 38 th Parallel.

Eisenhower's leadership style of sincerity, fairness, and optimism helped to comfort the nation after the war.

The Rise and Fall of Joseph McCarthy

In February 1950, Republican Senator Joseph R. McCarthy दोषी Secretary of State Dean Acheson of employing 205 Communist party members. Even though the accusations later proved to be false, McCarthy gained the support of the public. With the Republican victory in the election of 1952, his rhetoric became bolder as his accusations of communism grew.

McCarthyism, the practice of spreading treasonous accusations without evidence, thrived during the Cold War. Though McCarthy was not the first red-hunter, he was the most ruthless.

में 1954, McCarthy went too far and attacked the U.S. Army. Just a few months later, he was condemned by the Senate for "conduct unbecoming a member." (Army-McCarthy hearings)

Desegregating the South

All aspects of life of black life in the South were governed by the Jim Crow laws. Blacks were segregated from whites, economically inferior, and politically powerless. Gunnar Myrdal exposed the contradiction between America's professed belief that all men are created equal and its terrible treatment of black citizens in his book, एक अमेरिकी दुविधा (1944).

में स्वेट वी. पेंटर(1950), the Supreme Court ruled that separate professional schools for blacks failed to meet the test of equality.

में December 1955, रोज़ा पार्क्स refused to give up her seat to a white person on a bus in Montgomery, Alabama. Her arrest sparked a yearlong black boycott of the city buses (Montgomery bus boycott) and served notice throughout the South that blacks would no longer submit to segregation.

Reverend Martin Luther King, Jr. rose to prominence during the bus boycott.

Seeds of the Civil Rights Revolution

Hearing of the lynching of black war veterans in 1946, President Harry Truman ended segregation में federal civil service and ordered "equality of treatment and opportunity" in the armed forces में 1948.

After Congress and new President Eisenhower ignored the racial issues, Supreme Court Chief Justice Earl Warren stepped up to address civil rights for African Americans.

में Brown v. Board of Education of Topeka, Kansas (1954), the Supreme Court ruled that segregation in public schools was unequal and, thus, unconstitutional. The decision reversed the previous ruling in प्लेसी बनाम फर्ग्यूसन(1896).

Southern states opposed the ruling. Congressmen from these states signed the "Declaration of Constitutional Principles" में 1956, pledging their unyielding resistance to desegregation.

President Eisenhower did not support integration because he shied away from social issues. में September 1957, Orval Faubus, the governor of Arkansas, used the National Guard to prevent 9 black students from enrolling in Little Rock's Central High School. Confronted with a direct challenge to federal authority, Eisenhower sent troops to escort the children to their classes.

में 1957, Congress passed the first Civil Rights Act since Reconstruction Days. It set up a permanent Civil Rights Commission to investigate violations of civil rights and it authorized federal injunctions to protect voting rights.

Reverend Dr. Martin Luther King, Jr. formed the Southern Christian Leadership Conference (SCLC) में 1957. It sought to mobilize the power of black churches on behalf of black rights.

पर February 1, 1960, 4 black college students in Greensboro, North Carolina demanded service at a whites-only lunch counter. Within a week, the sit-in reached 1,000 students, spreading a wave of wade-ins, lie-ins, and pray-ins across the South demanding equal rights. In April 1960, southern black students formed the Student Non-Violent Coordinating Committee (SNCC) to give more focus to their efforts.

Eisenhower Republicanism at Home

When dealing with people, President Eisenhower was liberal, but when dealing with the economy and the government, he was conservative. He strived to balance the federal budget and to guard America from socialism.

में 1954, giving in to the Mexican government's worries that illegal Mexican immigration to the United States would undercut the bracero program of legally imported farmworkers, President Eisenhower deported a million illegal immigrants in Operation Wetback.

Eisenhower tried to revert to the policy of assimilating Native American tribes into American culture,but his plan was dropped in 1961 after most tribes refused to comply.

Eisenhower wanted to cancel New Deal programs, but he lacked pulic support to do so. He supported the Federal Highway Act of 1956, which created thousands of miles of federally-funded highways.

Eisenhower only managed to balance the budget 3 times while in office (8 years). में 1959, he incurred the biggest peacetime deficit in the history of the United States.

A "New Look" in Foreign Policy

में 1954, secretary of state John Foster Dulles proposed a policy of boldness in which a fleet of superbombers would be built and equipped with nuclear bombs (called the Strategic Air Command, या SAC) This would allow the U.S. to threaten countries such as the Soviet Union and China with nuclear weapons.

पर Geneva summit conference in 1955, President Eisenhower attempted to make peace with the new Soviet Union dictator, निकिता ख्रुश्चेव, following Stalin's death. Peace negotiations were rejected.

The Vietnam Nightmare

In the early 1950s, nationalist movements tried to throw the French out of Vietnam. Vietnam leader Ho Chi Minh became increasingly communist while America became increasingly anticommunist.

After the nationalists won at the Battle of Dien Bien Phu में 1954, a peace was called. Vietnam was divided at the 17 th parallel. Ho Chi Minh was given the north, while a pro-Western government, led by Ngo Dinh Diem, was given the south. The Vietnamese nationalists were promised a nationwide election two years after the peace accords, but this never happened because it looked the communists would win.

Cold War Crises in Europe and the Middle East

में 1955, पश्चिम जर्मनी was let into नाटो. Also in 1955, the Eastern European countries and the Soviets signed the वारसा संधि. This was a communist military union to counteract NATO.

In May 1955, the Soviets ended the occupation of Austria. In 1956, Hungary rose up against the Soviets attempting to win their independence. When their request for aid from the United States was denied, they were slaughtered by the Soviet forces. America's nuclear weapon was too big of a weapon to use on such a relatively small crisis.

में 1953, in an effort to secure Iranian oil for Western countries, the CIA created a तख्तापलट that installed Mohammed Reza Pahlevi as the dictator of ईरान.

President Nasser का मिस्र sought funds from the West and the Soviets to build a dam on the Nile River. After the Americans learned of Egypt's involvement with the Soviets, the Americans withdrew their monetary offer. As a result, Nasser nationalized the Suez Canal, which was owned by the French and British. In October of 1956, the French and British attacked Egypt, starting the Suez Crisis. The two countries were forced to retreat after America refused to provide them with oil.

Eisenhower Doctrine: a 1957 pledge of U.S. military and economic aid to Middle Eastern nations threatened by communist aggression.

में 1960, Saudi Arabia, Kuwait, Iraq, Iran, and Venezuela joined together to form the Organization of Petroleum Exporting Countries (OPEC).

President Eisenhower decidedly beat his Democratic opponent, Adlai Stevenson, and he was reelected in the election of 1956.

Fraud and corruption in American labor unions caused the president to take an interest in passing labor laws. में 1959, President Eisenhower passed the Landrum-Griffin Act. It was designed to hold labor leaders more accountable for financial illegalities.

पर 4 अक्टूबर 1957, the Soviets launched the स्पुतनिक आई satellite into space. In November, they launched the satellite Sputnik II, carrying a dog. The two satellites gave credibility to Soviet claims that superior industrial production is achieved through communism.

In response, President Eisenhower established the National Aeronautics and Space Administration (नासा).

The technological advances in the Soviet Union made Americans think that the educational system of the Soviet Union was better than the United State's system. में 1958, NS National Defense and Education Act (NDEA) gave $887 million in loans to college students and in grants to improve teaching sciences and languages.

The Continuing Cold War

Due to environmental concerns, the Soviet Union and the United States suspended nuclear tests in March and October 1958, respectively.

में जुलाई 1958, Lebanon called for aid under the Eisenhower Doctrine as communism threatened to take over the country. में 1959, Soviet dictator Khrushchev appeared before the U.N. General Assembly and called for complete disarmament. में 1960, an American U-2 spy विमान was shot down in Russia, ending the possibility of an quick peaceful resolution.

Cuba's Castroism Spells Communism

Latin Americans began to show dissent towards America as the United States seemed to neglect Latin America's economic needs in favor of Europe's. They also despised constant American intervention. In 1954, for example, the CIA led a coup that overthrew a leftist government in Guatemala.

Fidel Castro led a coup that overthrew the American-supported government of क्यूबा में 1959. Castro became militarily and economically allied with the Soviet Union it had become a military satellite for the Soviet Union.

In August 1960, Congress authorized $500 million to prevent communism from spreading in Latin America.

Kennedy Challenges Nixon for the Presidency

The Republicans nominated रिचर्ड निक्सन to run for president and Henry Cabot Lodge, Jr. for vice president in the election of 1960. The Democrats nominated जॉन एफ़ कैनेडी to run for president and लिंडन बी जॉनसन for vice president.

John F. Kennedy's रोमन कैथोलिक ईसाई irritated the Protestant people in the Bible Belt South.

Kennedy said that the Soviets, with their nuclear bombs and Sputniks, had gained on America's prestige and power. Nixon was forced to defend the existing administration (Republican) and claim that America's prestige had not slipped.

Television played a key role in the presidential election as Kennedy's personal appeal attracted many people. कैनेडी जीत लिया the election of 1961, gaining support from workers, Catholics, and African Americans.

An Old General Fades Away

America was economically prosperous during the Eisenhower years. अलास्का तथा हवाई became states in 1959. As a Republican president, Eisenhower had helped integrate the reforms of the Democratic New Deal and Fair Deal programs into American life.

A Cultural Renaissance

न्यूयॉर्क became the art capital of the world after WWII.

जैक्सन पोलक helped develop abstract expressionism in the 1940s and 1950s.

American architecture also progressed after WWII. Many skyscrapers were created in a modernist or "International Style."

Pre-war realist, Ernest Hemingway लिखा था The Old Man and the Sea (1952). John Steinbeck, another pre-war writer, wrote graphic portrayals of American society. Joseph Heller's Catch-22 (1961) discussed the antics and anguish of American airmen in the wartime Mediterranean.

The problems created by the new mobility and affluence of American life were explored by John Updike तथा John Cheever. Louis Auchincloss wrote about upper-class New Yorkers. Gore Vidal wrote a series of historical novels.

शायरी तथा playwrights also flourished during the postwar era. Books by काला authors made best-seller lists. Led by विलियम फॉल्कनर, the South also had a literary renaissance.


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